परीक्षाओं में असफलता : 10 कारणों पर विचार

परीक्षाओं में असफलता 

परीक्षाओ में असफलता ही किसी भी छात्र के जीवन को प्रभावित कर देती है. वर्तमान वर्ष 2017 में बिहार बोर्ड की परीक्षाओ में बहुत खराब प्रतिशत परिणाम आया है. हमने आज तक परीक्षा को उत्तीर्ण करने की बात सुनी है. परीक्षा में विफलता शब्द समाज में स्वीकार्य नहीं है. लोग इसे अपमान की बात मानते हैं। भारत ने सीसीई (CCE) प्रणाली को अभूत बड़ी समस्या के रूप में देखी गयी हैं. स्कूल प्रशासन आठवीं कक्षा के नीचे के छात्रों को परीक्षाओ में अनुतीर्ण करने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं. इसको एक गंभीर समस्या के रूप में देखा जा रहा है। अप्रैल 2017 में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा आयोजित एक बैठक में इस समस्या पर निर्णय लिया गया है। पर किसका कोई उपयुक्त समाधान नहीं मिला है और मामला विभिन्न राज्य सरकारों पर  छोड़ दिया गया है। अब हर राज्य सरकारों को एक मजबूत और दृढ़ निर्णय लेने की प्रतीक्षा है। उस बैठक में एक ऐसी नीति को तय करने के लिए कहा गया जो विद्यालयों को स्वतंत्र अधिकार दिया जाये जो किसी को भी अच्छा न पढने पर अनुत्तीर्ण कर सके.



मैं व्यक्तिगत रूप से सोचता हूं कि सरकार को एक मजबूत कदम उठाना होगा और स्कूल प्रशासन को स्वतंत्र अधिकार देना होगा। शिक्षकों को उन छात्रों को उसी कक्षा में रोकने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए जिसमे छात्र पूरी ईमानदारी से पढाई न की हो. किसी भी विषय को हम तीन घंटे की परीक्षा तक सीमित होकर परिणाम नहीं दिया जा सकता. अपितु मूल्यांकन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए। बहुत से लोग व्यापक सतत मूल्यांकन की अवधारणा पर सहमत नहीं हो सकते हैं। लेकिन छात्रों पर निरंतर जांच करने के लिए यह सबसे अच्छा तरीका है। ये जरुरी है की इसके माध्यम से शिक्षको के कार्य का भोझ बढ़ जाता है लेकिन यदि शिक्षक अपने छात्रों से सचमुच प्रेम करते है तो वो ये ही करने के लिए सदैव तैयार रहेंगे.

बिहार के इंटरमीडिएट परिणाम २०१७ का पास ग्राफ़

2012 का प्रतिशत 90.74

2013 का प्रतिशत 88.04

2014 का प्रतिशत  76.20

2015 का प्रतिशत 87.45

2016 का प्रतिशत 62.19

2017 का प्रतिशत 35.24

यह ग्राफ़ गिरने और बिहार बोर्ड के उत्तीर्ण छात्रों का सही संकेत है। यह समाज के लिए बहुत ही सकारात्मक संकेत नहीं है।

परिणाम गिरने के पीछे कारण

हम हमेशा सिस्टम में दोष और हमारे आस-पास होने वाली चीजों के लिए तैयार हैं। लेकिन हम हमेशा स्थिति के पीछे के कारणों को आत्मसात करने में विफल रहते हैं। एक प्रणाली में कमियों को ढूँढना बहुत आसान है। हमारी फोकस समस्याओं के हल खोजने पर भी होना चाहिए।

1. छात्र, गंभीर अध्ययन के बारे में नहीं

ज्यादातर समय यह पाया गया है कि छात्र अपनी पढ़ाई को ले करे गंभीर नहीं हैं अक्सर हम भोजनावकाश के बाद के समय में स्कूल को खाली पाते हैं। पहली घंटी में कक्षाएं भरे हुए होते है हैं क्योंकि छात्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेना चाहते हैं। सरकार मध्यान-भोजन, छात्रवृत्ति, नि: शुल्क यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति प्रदान करती है, ये विभिन्न योजनाएं हैं जो छात्रों को स्कूलों में लाती हैं। लेकिन इन योजनाओं का विशेषाधिकार हासिल करने के लिए 75% उपस्थिति प्राप्त करने के लिए एक आकर्षण है।

2. अनुतीर्ण न करने की नीति

छात्रों को तनाव मुक्त रखने के प्रमुख कारणों में से एक है, कक्षा आठ तक किसी को भी अनुतीर्ण न करने की नीति निरधारित की गयी है। यह छात्रों को एक आसान मौका दे रहा है। छात्र अच्छी तरह जानते हैं कि शिक्षक उन्हें पास करने के लिए बाध्य हैं और उनको अगली कक्षा में जाने के लिए कोई भी रोक नहीं सकता है। कई स्कूलों में छात्रों का मूल्यांकन करने के लिए कोई पुरे साल में कोई भी परीक्षा नहीं होती है। विद्यालय कक्षा के हर छात्र को उत्तीर्ण करने और अगली कक्षा में उन्हें बढ़ावा देने के लिए बाध्य हैं।

3. कठिन मेहनत की आवश्यकता

कड़ी मेहनत के बिना कोई सफलता नहीं प्राप्त की जा सकती है। इन दिनों विद्यार्थी सिर्फ स्कूल जाते हैं और मौज मस्ती के कुछ समय बीतते हैं। कई छात्र सिर्फ कोचिंग पढने जाते हैं इसलिए उनको नियमित कक्षों में कोई भी रुचि नहीं लगती. वो सोचते है कोचिंग की पढाई ही उन्हें आदर्श बना सकती है. इन दिनों हम पाते हैं कि विद्यार्थी गुणवत्ता की शिक्षा के लिए नहीं जाते हैं। वे सिर्फ डिग्री और मार्क शीट के बारे में केन्द्रित होते है और उनका ध्यान केवल इन्ही पर होता है। विद्यार्थियों को जीवन चलाने के लिए उन्हें कठिन मेहनत की जरुरत है. लेकिन ये देखा गया है की छात्र आज छात्र अपनी पढ़ाई के प्रति एकदम गंभीर नहीं हैं। यही आदत उनको आलसी बना देता है और वे कड़ी मेहनत पर ध्यान नहीं जिससे आगे चल कर उनको जीवन में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

4. अन्य गतिविधियों में व्यस्त

हम आज कल अपने दैनिक अध्ययन को छोड़ अन्य गतिविधियों में व्यस्त कई छात्रों को पाते हैं। इस स्मार्टफोन के युग में आज हर बच्चे के हाथ में एक स्मार्ट फ़ोन देखने को मिल जायेगा. कई बच्चे तो स्मार्ट फ़ोन ऐसा बदलते है जैसा वो रोजाना कपड़ा बदलते है. कई छात्रों के लिए स्मार्टफोन एक जरुरत और उनकी प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया है। कई छात्रों ने स्कूल की शिक्षा को इतनी गंभीरता से नहीं लिया कि उनके माता-पिता, शिक्षक, और स्कूल प्रशासन लगातार बच्चे की प्रगति के बारे में सोचते रहते है लेकिन बच्चे को ही अपने भविष्य के बारे में कोई परवाह नहीं होती। वह सोते है कि जीवन स्मार्टफोन के संचालन की तरह रंगीन और मस्ती भरा होता है। उनको लगता है कि उंगलियों के साथ एक पैड पर खेलना ही जीवन है।

5. समय और ऊर्जा की बर्बादी

कई छात्र सफलता हासिल करने के लिए एक भी कदम न लेते और न कोई प्रयास करते है. वो सिर्फ सफलता का सपना देखते हैं। उन्हें लगता है कि जीवन बहुत आसान प्रक्रिया है जो बड़ी ही आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। वे भूल जाते हैं कि किसी भी सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता है.  हालांकि, कई छात्र केवल अपने स्कूल के समय के दौरान मौज- मस्ती और समय बिताने की ही इच्छा रखते हैं। वे कोचिंग के लिए तो घर से जरुर जाते हैं लेकिन कई बार कोचिंग की क्लास तक नहीं पहुचं पाते.  कई तो शिक्षक भी ऐसे है को कभी उनके माता पिता से उनके न आने का कारण भी पता नहीं करते. ऐसे छात्र घर के बाहर ही अपना समय बिता कर वापस आ जाते हैं। घर आ कर वे इतना थके दिखते है मानो कितनी मेहनत करके आये हो. और फिर अब शायद ही अध्ययन के लिए पर्याप्त समय निकाल सकते हैं। बस घर आना मम्मी से खाना मांगना, खा कर सो जाना ये है उनकी ज़िन्दगी. इस तरह वे अपने जीवन में अपने लक्ष्य को हासिल करने में असमर्थ रह जाते हैं। छात्र हमेशा भूल जाते हैं कि बिता हुवा समय कभी भी पलट कर नहीं आता है।

6. स्पष्ट विकल्प होने में विफल

ज़िंदगी में बहुत से लोग स्पष्ट विकल्प नहीं बनाते हैं। उनके लिए, जीवन उतना आसान हो जाता है जितना वे इसे देखते हैं। एक बार वे 18 या 1 9 वर्ष की उम्र में सोचते हैं कि वे दुनिया के सबसे ऊपर हैं यह उनके लिए मज़ेदार और बहुत आसान जीवन जीने का समय है। वे अपने साथी समूह द्वारा बहुत प्रभावित हुए हैं समूह के किसी सदस्य का पालन करने के लिए उनकी दोस्ती के सम्मान के निशान के रूप में उनका पालन करने का प्रयास करेंगे। वे यह नहीं देख पाएंगे कि जीवन उनकी दोस्ती से बहुत अधिक है। यह उनके जीवन में एक निर्वात बनाता है और वे लंबे समय तक सोचने में असमर्थ हैं। मैं नहीं कहता कि दोस्ती अच्छा नहीं है। मुख्य बात यह है कि मैं अपना जीवन सफलतापूर्वक जीता हूं जहां मैं अपने परिवार का समर्थन करने में सक्षम हूं। हमें अपने जीवन के लक्ष्य को उस रेखा के अनुसार तय करना होगा जो हम अपने भविष्य के लिए लेना चाहते हैं। किसी भी गलत निर्णय हमेशा किसी भी लंबे समय तक हानिकारक होता है। यह हमारे व्यक्तिगत विकास को भी प्रभावित करता है

7. खराब भाषा कौशल

यह आम तौर पर देखा जाता है कि लोग अपने स्कूली शिक्षा के दौरान भाषा विषयों का चयन सोच समझ कर नहीं करते हैं। वे किसी भी परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए भाषा को एक सामान्य विषय के रूप में सीखते हैं। आज संचार कौशल जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। कई छात्रों को इसका महत्त्व तब पता चला है जब वे किसी भी पेशेवर के लिए अपने जीवन में अपना कदम रखते हैं। एक छात्र की सफलता या विफलता अपने कॉलेज जीवन के दौरान भाषा के स्वामित्व पर निर्भर है। आम तौर पर हम देखते हैं कि एक छात्र को लिखना, बोलना और सुनना और समझने में छमता होना चाहिए. इन भाषा क्षमताओं में से एक भी अप्रभावी होने से उनको कठिनाइयों का सामना करना पढता है। कई बार छात्र खुद को किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार करते हैं लेकिन वे बहुत आसान अवधारणाओं को समझने में सक्षम नहीं होते हैं। जब तक अवधारणा बहुत स्पष्ट नहीं होती है, किसी भी तरह के अध्ययन से निपटना बहुत मुश्किल होता है। परीक्षा उत्तीर्ण करना कोई बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन जीवन में बनाए रखने में सक्षम होना बहुत महत्वपूर्ण है। किसी भी व्यक्ति के पास एक अच्छी भाषा कौशल होती है तो वो सफलता आसानी से प्राप्त कर सकता है.

8. व्यक्तिगत मानक गुणवत्ता

स्कूल के जीवन के दौरान, एक छात्र की कुल जिम्मेदारी एक शिक्षक के हाथों में होती है। कई बार छात्र कुछ प्रमाण पत्र और डिग्री प्राप्त करने के लिए प्रवेश लेते हैं। इससे उन्हें स्कूल की गलत पहचान ले जाते है ऐसे स्कूलों में, उनकी उपस्थिति कभी महत्व की बात नहीं होती है। वे केवल तब और जब वे चाहें कक्षा में भाग लेते हैं। यह संभव है कि वे केवल उन कक्षाओं के लिए स्कूल जाते हैं जिन्हें उनको लगता है कि जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। यह उन्हें जीवन के लिए एक व्यक्तिगत मानक गुणवत्ता रखने में मदद नहीं करता है। वे इस अवधारणा के साथ आगे बढ़ते हैं कि वे जीवन में सफलता हासिल करेंगे। वे अक्सर कक्षा सामग्री की उनकी समझ और उनके लिखित कार्य की गुणवत्ता को अधिक महत्व देते हैं। इससे जीवन में उनकी मानक गुणवत्ता कम हो जाती है

9. दायित्व को समझने में विफल

छात्र आजकल अपनी पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करते रहे हैं. वे अब अपने जीवन में किसी की भी दखलंदाजी को पसंद नहीं करते है.  वे अपने दिन-प्रतिदिन की गतिविधि में आज़ादी की तलाश करते हैं। समय का चुनाव हो या  व्यक्तिगत आदत, सामाजिक गतिविधियों के उपयोग के बारे में वे अपनी अलग ही सोच रखते है, यहां तक ​​कि कक्षा में भाग लेने या असाइनमेंट करने के लिए भी वो सोचते है की कोई मदत कर दे की काम पूरा हो जाये. आज स्मार्टफोन एक छात्र के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये स्मार्टफोन जीवन को उनके लिए बहुत आसान बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र अपने कक्षा के होमवर्क या असाइनमेंट करता है तो वह उसे अपने सारे दोस्तों में बाट देता है . वे अपने कार्य के लिए कोई भी ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं और सिर्फ प्राप्त सामग्री को किसी तरह उतर कर अपनी कॉपी में लिख लेते है और अपने शिक्षक को जमा कर देते है। यहां तक ​​कि वे इन होमवर्क को अपने भविष्य की परीक्षाओं के लिए याद तक नहीं रख पाते है किसका परिणाम उनका परीक्षा में अनुतीर्ण ही निकलता है।

10. मानसिक समस्याओं को समझना

कई छात्रों के लिए स्कूल और कॉलेज जीवन सिर्फ मजे करना और समय बिताने करने के लिए है. वही दूसरी तरफ कई छात्र इस समय का सदुपयोग करते है और अपने उचित विकास के लिए बिताते है. समय की सफलता को जानने के लिए और भविष्य के लिए महान सफलता हासिल करने के लिए उन व्यक्तियों के जीवन और संघर्ष को जानना भी बहुत जरुरी है जिन्होंने विपरीत संघर्ष भरी ज़िन्दगी में जी कर भी सफलता हासिल की है। माता-पिता से भावनात्मक स्वतंत्रता स्थापित करने के समय अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को देखने और समझने पर ही सफलता हासिल हो सकती है. सहकर्मी समूहों के साथ संबंध स्थापित करने में जीवन में मनोवैज्ञानिक समस्याओं को सही से उभरने में मदतगार साबित होता हैं। कोई भी गलत निर्णय उनके जीवन को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकता है। अतः जीवन में सदेव ही मजबूत होना और एक अच्छा निर्णय लेने में सक्षम होना ही जीवन की कामयाबी का मन्त्र होना चाहिए।

एक बार लेख पढ़ना पूर्ण करने के बाद परीक्षा तैयार करने के लिए कुछ समय दें: Examination Preparation: Ten Tips of Studies

Leave a Reply